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Apple ber cultivation importance and marketing


एप्पल बेर या Apple Ber बेर की एक उन्नत किस्म है। यह उन्नत तकनीक के उपयोग से तैयार की गई किस्म है।

The cultivation of apple ber is a very beneficial farming business. Due to its high nutritional value and excellent taste, its demand and market price rarely goes down.

An unripe fruit
Contents
(1). महत्व
(2). Apple ber nutritional value
(3). विशेषताएं (Characteristics)
(4). एप्पल बेर की खेती (Cultivation of apple ber)
(5). बाजार
(6). ग्रेडिंग

(1). महत्व (Importance of Apple Ber)

  • अधिक उत्पादन (High yield).
  • अधिक मांग (More demand).
  • एक्सेप्टेंस (Market acceptance).
  • अधिक मूल्य (Price of apple ber).

1.1: अधिक उत्पादन (High yield)

यह किस्म अपनी अधिक उत्पादन के लिए जानी जाती है। प्रति हैक्टेयर अधिक संख्या की वजह से उत्पादन भी अधिक होता है। बड़े फल और प्रति शाखा औसतन अधिक फल लगना भी अधिक उत्पादन होने की प्रमुख वजह है। अधिक उत्पादन प्राप्त करने में जलवायु भी सहायक होती है।

1.2: अधिक मांग (More demand)

जंगली बेर अपनी चिकत्सकीय गुणों के कारण जानी जाती है, हालांकि बाजारों में इसकी मांग न के बराबर ही होती है। वहीं एप्पल बेर अपने बड़े आकार और स्वाद के कारण जानी जाती है, और यही वजह है कि हर तरह के बाजारों अर्थात् क्षेत्रीय व शहरी बाजारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। एक किसान को इसे बाजार तक ही लाने की जिम्मेदारी होती है, इसके पश्चात इसकी बिक्री कुछ ही समय में हो जाती है।

1.3: एसेप्टेंस (Market acceptance)

अपने गुणों के कारण इसका उपभोक्ताओं इसे आसानी से स्वीकार किया जाता है। इसका बड़ा आकार, रंग व आकार उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

1.4: अधिक मूल्य (Price of apple ber)

बेर की अन्य किसी भी किस्म की तुलना में इस किस्म के फलों की कीमत अधिक होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी कीमत 30 से 50 रू. प्रति किलो होती है जबकि शहरी क्षेत्रों में इसके फलों की कीमत 40 से 100 रू. प्रति किलो होती है। व्यवसायिक रूप से इसकी खेती करने पर अन्य किसी भी ट्रॉपिकल फलों की तुलना में इससे अधिक लाभ होती है।

(2). पोषक मूल्य (Apple ber nutritional value per fruit)

S.N.ComponentsValue
1.Essential amino acid18
2.Carbohydrates5.66 g
3.Energy22 Kcal
4.Protein0.34 g
5.Total fat0.06 g
6.Cholesterol0 mg
Source: USDA
S.N.VitaminValue
1.A11.12 mg
2.C19.3 mg
3.Thiamin0.0 mg
4.Riboflavin0.0 mg
5.Niacin0.3 mg
Source: USDA

(3). विशेषताएं (Characteristics)

  • आकार।
  • स्वाद।

3.1: आकार (Shape)

इसका आकार सेब के समान ही होता है, इसलिए इसे apple ber कहा जाता है। अधिकतर फलों का आकार मध्यम आकार के सेब के फलों के बराबर होता है।

3.2: स्वाद (Taste)

फलों में खट्टापन नहीं होता है। कच्चे फलों में नाम मात्रा का ही कट्टापन होता है। पके फलों में खट्टापन नहीं होता है, और यही वजह है कि कीट प्रबंधन की उत्तम व्यवस्था न होने पर फलों में फल बेधक का आक्रमण हो जाता है।

(4). एप्पल बेर की खेती (Cultivation of apple ber)

4.1: जलवायु

बेर एक ट्रॉपिकल और सबजे-ट्रॉपिकल जलवायु का पौधा है। इसकी खेती भारत में ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों को छोड़कर सभी भागों में आसानी से की जा सकती है। यह शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाई जा सकती है। यह बहुत ही सहनशील पौधा है। हालांकि apple ber के लिए ज्यादा शुष्क जलवायु पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए हानिकारक होती है, क्योंकि इसके लिए लगातार अंतराल में सिंचाई की जरूरत होती है।

4.2: भूमि

इसे किसी भी तरह की भूमि में उगाई जा सकती है। भारी से लेकर हल्की भूमि, हर तरह की भूमि इसके लिए उपयुक्त होती है। यह लवणयुक्त भूमि को भी सहन कर सकता है। हालांकि दलदली भूमि पौधों के लिए उपयुक्त नहीं होती है।

4.3: भूमि की तैयारी

जून के महीने में गड्ढे के खुदाई की जाती है। इसके लिए पहले कागज में एक layout तैयार किया जाता है। रोपण की वर्गाकार विधि का प्रयोग करें। 4.5 × 4.5 सेंटी मीटर की दूरी पर गड्ढों की खुदाई की जाती है। हर पौधे के लिए 60 × 60 × 60 सेंटी मीटर के आकार के गड्ढों की खुदाई की जाती है। खुदाई के समय गड्ढे से निकले मिट्टी के 2/3 भाग को एक छोर पर रखा जाता है तथा मिट्टी के 1/3 भाग को दूसरी छोर पर रखा जाता है।

4.4: गड्ढे की भराई

मिट्टी में खाद मिलाना: दोनों छोरों की मिट्टी में 20 किलो खाद मिलाया जाता है। इसे अच्छी तरह से मिलाया जाता है।

मिट्टी में उर्वरक मिलाना: NPK का अनुपात 20:10:20 रखा जाता है। हर गड्ढे में 20 ग्राम N, 10 P, और 20 ग्राम K मिलाया जाता है।

अब गड्ढे से निकाले गए मिट्टी के 2/3 भाग से गड्ढे से भराई पहली भराई की जाती है, इसके पश्चात बाकी बचे 1/3 भाग से गड्ढे को भरा जाना चाहिए।

4.5: पौधों का रोपण

सबसे पहले पौधों की खरीदी की जाती है। इसकी प्राप्ति के निम्न. स्त्रोत हैं:

  • प्राइवेट पौध नर्सरी।
  • सरकारी पौध नर्सरी।
  • पौध उत्पादक किसान।

नोट: सरकारी पौध नर्सरियों में यह अनुदान या बिना पैसों ही मिल जाता है। इसके लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी (Rural Horticulture Extension Officer) से संपर्क किया जा सकता है। ये पौधे Budding विधि से तैयार की जाती हैं।

पौध रोपण के समय पॉलीथीन शीट निकाल दी जाती है, लेकिन मिट्टी व जड़ को हानि न पहुंचे इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। गड्ढे के बीचों बीच मिट्टी को कुछ गहराई तक हल्का करें और पौधे की रोपाई करें। पौधे के जड़ व जड़ों को चारों ओर से घेरे हुए soil body भूमि के अंदर रोपित होने चाहिए, पर इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि कलम किया हुआ भाग भूमि के अंदर न जाए।

4.6: सिंचाई

  • पहली सिंचाई पौध रोपण के तुरंत बाद ही की जाती है।
  • ठंड के दिनों में 10 से 15 दिनों के अंतराल में सिंचाई की जानी चाहिए।
  • गर्मी के मौसम में हर सप्ताह सिंचाई की जानी चाहिए।

4.7: उर्वरक प्रबंधन

S.N.Fertilizers/Manures1st yearSecond year
1.Farm yard manure25 kg50-60 kg
2.Nitrogen200 g500 g
3.Phosphorus100 g200 g
4.Potash200 g500 g

4.8: कंटाई व छंटाई

शुरुवात साल में training की बहुत आवश्यकता होती है। रूट स्टॉक के आसपास निकलने वाले अनचाहे शाखा को काट दिया जाता है। भूमि से 75 सेंटी मीटर की ऊंचाई तक एक ही तना रखा जाता है। अनचाहे व बीमारी से प्रभावित सभी शाखाओं तथा टहनियों को काट कर अलग कर दिया जाता है। इसके लिए secateurs का उपयोग किया जाता है।

4.9: फसल सुरक्षा

Apple Ber के मुख्य रूप से दो ही महत्वपूर्ण कीट होते हैं। पहला फल बेधक और दूसरा पत्ती भक्षक इल्ली। इन दोनों कीटों के नियंत्रण के लिए chlorpyriphos 20EC, 2ml प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।

बीमारियों में पत्ती सड़न (black leaf spot) और anthracnose हैं। इसके नियंत्रण के लिए carbendazim का उपयोग किया जाता है, तथा anthracnose के लिए कॉपर युक्त कवकनाशी का उपयोग करें।

(5). बाजार

ग्रामीण क्षेत्रों में इसे चिल्हर उत्पाद के रूप में बेचा जा सकता है।
बड़े बाजारों में एक साथ थोक रूप में बेंच जा सकता है।
Contract farming करना या दूरस्थ बाजारों में बिक्री करना अधिक लाभदायक होता है।

(6). ग्रेडिंग

आकार के आधार पर फलों का वर्गीकरण

  • बड़े आकार के फल।
  • मध्यम आकार कर फल।
  • छोटे आकार के फल।

भौतिक अवस्था के आधार पर फलों का वर्गीकरण

  • चोट लगे हुए फल।
  • अधिक पके हुए फल।
  • कच्चे फल।

इन्हे अलग कर दिया जाता है, तथा बाजारों में नहीं भेजा जाता है।

फलों का संग्रहण

3°C से 10°C पर फलों का शीत संग्रहण करने पर 3 से 30 दिनों तक का सेल्फ लाइफ बढ़ाया जा सकता है।

जूट से बने बोरों, कार्ड बोर्ड बॉक्स, तथा नायलॉन के धागों से बने बैग में फलों की पैकिंग की जाती है।

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