Sarna Puja and Agriculture

Sarna Puja ( सरना पूजा) and Agriculture

Sarna Puja is a tradition or religious rite, or in broader context it is the whorship of Rural Deity which is known as ‘ग्राम्य देवता’।

A Baiga Performing Puja

Sarna Puja (सरना पूजा)

  • छत्तीसगढ़ की परम्पराएं।
  • ग्राम्य देवता।
  • ग्राम पूजा।

सरना पूजा क्या है? (What is Sarna Puja?)

सरना पूजा या Sarna Puja एक धार्मिक और सामुदायिक परंपरा है। विशेष रूप से यह हिन्दू धर्म के कुछ समुदायों से सम्बंधित होती है।

छत्तीसगढ़ के उत्तरी संभाग और झारखण्ड के छोटा नागपुर क्षेत्र में यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है।

यह बरसात के मौसम के कुछ ही दिन पूर्व किया जाने वाला सबसे महत्व ग्राम्य पूजा है।

Don’t to be confused with Sarna Sthal or Sarna Dharm. Sarna Puja is an cult of worshipping the God of Village.

A system of religious veneration and devotion directed towards a particular figure or object

Ref.: Google and Oxford Language Dictionary For the definition of the word ‘Cult’.

Note: Minor difference can be seen among different communities from different places.

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क्यों किया जाता है सरना पूजा?

सरना पूजा (Sarna Puja) गाँव की समृद्धि के लिए की जाती है।

इन क्षेत्रों में राज्य की अन्य भागों की तरह धान ही मुख्य फसल है।

छत्तीसगढ़ के मध्य भाग (छत्तीसगढ़ का मैदान) में धान की दो फसलें ली जाती हैं, जबकि उत्तरी छत्तीसगढ़ और पश्चिम झारखण्ड (छत्तीसगढ़ की सीमा से लगी) में धान की एक ही फसल ली जाती है।

अतः मुख्य फसल होने के कारण मानसून आते ही फसल की सुरक्षा एवं अधिक उत्पादन के लिए ग्राम्य देवता की पूजा की जाती है।

किस महीने की जाती है पूजा?

यह पूजा अधिकतर जून के महीने ही की जाती है। इस वर्ष 2021 में यह पूजा विभिन्न भागों में 25 जून से 30 जून के बीच मनाई गई।

कौन करता है पूजा?

यह पूजा गाँव के बैगा द्वारा की जाती है।

बैगा गाँव का वह सम्मानित व्यक्ति होता जिसके द्वारा एक ग्राम से सम्बंधित सभी पूजा संपन्न की जाती है।

यह पूजा गाँव के बैगा के द्वारा ग्राम्य देवता के सम्मान में की जाती है ताकि ग्राम्य देवता गाँव की सुरक्षा करें और धान फसल की पैदावार अधिक से अधिक हो सके।

कार्यक्रम

पूजा की शुरुआत सुबह से ही प्रारंभ हो जाती है।

गाँव के बैगा को आदर सम्मान के साथ उनके घर से सरना स्थल (Sarna Sthal) तक लाया जाता है।

Sarna Sthal वृक्षों और हरियाली से घिरी प्राकृतिक जगह होती है।

बैगा के द्वारा पूजा का प्रारंभ किया जाता है।

इस दौरान ग्राम्य देवता नर बकरे की बलि दी जाती है।

Note: यह Website किसी भी प्रकार की बलि का समर्थन नहीं करता। सभी से यही कहूँगा की हो सके तो जानवरों का शिकार न करें, और बलि देने जैसा कार्य कदापि न करें।

भोज

पूजा कार्य सम्पन्न होने के पश्चात ग्रामीणों द्वारा सरना स्थल के आसपास ही भोज किया जाता है। ग्रामीणों द्वारा महुआ दारू (एक प्रकार का मदिरा) और कोसना का भी सेवन किया जाता है।

Note: शराब सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मैं यह Website किसी भी प्रकार से शराब सेवन का समर्थन नहीं करता है।

सरना पूजा से जुड़ी गतिविधियां

सरना पूजा के अगले दिन से गाँव के सभी पशुओं जैसे – गाय, बैल, भेड़, बकरी, भैंस इत्यादि की चराई प्रारंभ हो जाती है। कोई भी पशु पालक अपनी पशुओं को खुला नहीं छोड़ते।

यह प्रथा विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में ही देखी जाती है।

Sarna Puja and Agriculture

The India Agriculture is based on Monsoon. It is known as rainfed agriculure.

This puja is performed just few days before the onset of monsoon, so that the village receives abundant rains and maximum paddy production.

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